Tuesday, January 25, 2022
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चिराग तेजस्वी साथ-साथःलालटेन की रोशनी में कितना जगमगाएंगे Chirag?-अनुभव सिन्हा

विमर्श(पटना) बिहार में पॉलिटिकल स्टेक होल्डर्स में न कोई नया चेहरा है और न ही होने वाला कोई प्रयोग नया होगा। लेकिन नये-नवेले तेजस्वी यादव अपनी सियासत में नयापन चाहते हैं। बदले हालात में यह प्रयोग कितना सफल होगा, यह एक बात है, लेकिन तेजस्वी की सियासत दांव पर लगी रहेगी यह पक्का है।

         कई बार यह बात सामने आई है कि नेता प्रतिपक्ष कुछ ऐसा करना चाहते हैं जो पिता की राजनीतिक लाइन से अलग दिखे ताकि उनका सियासी वजूद पहचाना जा सके। यह अभी तक सम्भव नही हो पाया है। लालू-राबड़ी राज और उनका अर्द्धशिक्षित होना बड़ा रोड़ा है।  

        ऐसे में विधानसभा उपचुनावों के बाद विधान परिषद के 24 सीटों पर होने वाले चुनावों में कामयाबी के लिहाज से वह कुछ नया करने की जुगत में हैं। इस बात पर चर्चा खूब हो रही है कि चिराग का लालू या तेजस्वी से आकिर क्या डील हुई है कि दोनों अब साथ चलने को तैयार हो गए हैं। चिराग तो इस बात की आधिकारिक घोषणा 28 नवम्बर को करने वाले थे । 28 नवम्बर को पार्टी स्थापना दिवस के रुप में मनाती है। लेकिन इसके पहले लालू प्रसाद यादव ने इसकी घोषणा कर दी है कि विदान परिषद चुनाव के दौरान कांग्रेस , राजद और लोजपा (आर) मिलकर चुनाव लड़ेंगें। सीटों के बंटवारे की बात बी लगभग तय है। बताया जा रहा है कि चिराग पासवान की पार्टी को लालू 3 से 4 सीट दे सकते हैं। 

यह सर्व विदित है कि चिराग पासवान को भी राजनीति विरासत में मिली है। लेकिन पिता का साया उनके सर पर नहीं है। 2019 में हुए लोकसभा चुनावों तक सबकुछ ठीक ठाक ही था। पर, 2020 के अक्टूबर-नवम्बर में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में चिराग का एनडीए के घटक जदयू के खिलाफ जाने के फैसले का परिणाम यह हुआ कि अब राजद के साथ गठबंधन कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उनका सिर्फ एक उम्मीदवार जीता था जो बाद में जदयू में शामिल हो गया। वह खुद अपनी पार्टी के इकलौता सांसद हैं।

लालू की घोषणा के साथ ही इसका खुलासा हो गया कि चिराग की नीतीश कुमार से तीखी सियासी अदावत ही राजद के साथ गठजोड़ की खास वजह है। यह गठजोड़ तब हो रहा है जब विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव होने वाले हैं और यह बी तय माना जा रहा है कि वाम दलों से ज्यादा सीटें यानी 3 से 4 सीटों चिराग को मिल सकती हैं।

बहरहाल तेजस्वी यादव की राजनीति इस बात पर आधारित है कि वह नीतीश कुमार का विकल्प बन सकें, जबकि 24 सीटों पर विधान परिषद के होने वाले चुनावों में चिराग पासवान की पार्टी की संगठनात्मक मजबूती या कमजोरी सामने आयेगी। विधान परिषद चुनावों में उन्हें गठबंधन का लाभ मिलता है तब इसका मतलब होगा कि चिराग लालटेन की रोशनी में “जलेंगे”। ते क्या बिहार के एक नए युवा चेहरे के भरोसे लालू ने कबी ना बुझने वाली लालटेन जलाई है ?

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