Sunday, November 28, 2021
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पीएम मोदी बोले: देश 100 करोड़ का आकंड़ा नहीं पार किया बल्कि नए अध्याय की शुरुआत की।

विमर्श( न्यूज डेस्क) देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन कोरोना वैक्सीनेशन के 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर लेने पर आधारित था। पीएम ने संबोधन की शुरुआत ही इसी से की । प्रदानमंत्री ने कहा कि हमने 100 करोड़ का आंकड़ा पार नहीं किया बल्कि एक नए अध्याय की शुरूआत की है। यह कठिन था लेकिन असाधारण लक्ष्य को हमने प्राप्त किया है। इसके पीछे 130 करोड़ देशवासियों की शक्ति लगी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हर देशवासी की सफलता है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने दिकाया कि हम हर चीज के लिए अब दूसरे देशों पर आश्रित नहीं है। पहले तो बड़े देशों के लिए वैक्सीन पर रिसर्च करना, वैक्सीन खोजना, इसमें दशकों से उनकी एक्सपर्टाइज थी. भारत तो पहले दूसरे देशों की बनाई वैक्सीन्स पर आश्रित होता था। आज जब भारत ने अपने बनाए वैक्सीन पर भरोसा किया और सबने मिलकर दुनिया के सामने एक मिशाल कायम की तब दुनिया भर में भारत के इस प्रयास की सराहना हो रही है। अभी हमें इतने पर रूकना नहीं है बल्कि हमें दुनिया के लिए वैक्सीन खोजना और दुनिया की मदद भी करना है.

लगभग दो साल में यह 10वीं बार प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया। दिवाली से पहले दिए 20 मिनट के संबोधन में मोदी का ज्यादातर फोकस कोरोना वैक्सीन के 100 करोड़ डोज पूरे होने और महामारी से निपटने के तरीकों पर रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह कपड़े पहनना , जूते पहन कर घर से बाहर निकलना हमने अपनी आदतों में शामिल किया है उसी तरह मास्क को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत वेद वाक्य से की । उन्होंने कहा कि ‘कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य आहितः’ इसे भारत के संदर्भ में देखें तो हमारे देश ने एक तरफ कर्तव्य का पालन किया तो उसे बड़ी सफलता भी मिली।

मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को फार्मा हब की तरह पहचान मिली है अब उसे और मजबूती मिलेगी। कोरोना महामारी की शुरुआत में यह भी आशंकाए व्यक्त की जा रही थीं कि भारत जैसे देश में इस महामारी से लड़ना मुश्किल होगा। यह भी कहा जा रहा था कि इतना संयम कैसे चलेगा, लेकिन भारत ने मुफ्त वैक्सीनेशन का अभियान शुरू किया। गांव, शहर, सुदूर देश का एक ही मंत्र रहा कि वैक्सीन भेदभाव नहीं करती तो वैक्सीनेशन में भी भेदभाव नहीं हो सकता। ये सुनिश्चित किया गया कि वैक्सीनेशन अभियान पर VIP कल्चर हावी न हो। कोई कितने ही बड़े पद पर क्यों न रहा हो, कितना ही धनी क्यों न रहा हो, उसे वैक्सीन सामान्य नागरिकों की तरह ही मिलेगी।

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