Monday, November 29, 2021
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संघर्ष की स्याही और मेहनत की कलम से लिखी सफलता की दास्तान

विमर्श न्यूज(पटना) इरादे अगर मजबूत हों तो कांटो से भरा सफ़र भी आसान बन जाता है. रविवार की शाम बिहार के युवाओं के लिए उम्मीदों की शाम थी. देर शाम बिहार लोक सेवा आयोग ने 64वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिया. आयोग द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार इस परीक्षा में 4 लाख 71 हज़ार से अधिक लोगों ने आवेदन किया था जिनमें से कुल 1454 उम्मीदवारों का चयन किया गया है. ओमप्रकाश गुप्ता ने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया.
यह परिणाम दो साल से कोरोना महामारी के कारण मानसिक तनाव झेल रहे बिहार के हजारों युवाओं के लिए एक उम्मीद की एक नयी किरण है. कोरोना के दूसरी लहर में अपनों को खोने और परिजनों के बीमार पड़ने के कारण राज्य के असंख्य युवा गम के अंधकार में डूबे हुए थे. बीपीएससी के इस परिणाम ने राज्य के केवल 1454 युवाओं में ही नहीं बल्कि लाखों युवाओं में जोश का नया संचार किया है. तालाबंदी के इस दौर में नौकरियां चली गयी हैं और भविष्य दांव पर लगा है. इस बुरे दौर में इस परिणाम ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे छात्रों में एक नया जोश भर दिया है.
बीपीएससी के इस परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सफलता का एक ही मूलमंत्र है- मज़बूत इरादा. अगर हौसला मज़बूत हो तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी मुकम्मल है. सफलता की इबादत मेहनत की कलम से लिखी जाती है. पटना के इंदिरा नगर में एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुभिनव कुमार ने इस परीक्षा में सफल होने के लिए लम्बा संघर्ष किया. नौकरी करते हुए घर की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्होंने कठिन मेहनत का रास्ता नहीं छोड़ा. मज़बूत हौसले से हर चुनौती का सामना करते हुए अंततः परीक्षा में सफल हुए. उन्हें अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग के चुना गया है .
सुभिनव बताते हैं कि प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास करना और जनता की सेवा करना उनका बचपन का सपना है परन्तु भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण घर की आर्थिक स्थिति को दुरुस्त करना भी उनकी जिम्मेदारी थी. इसलिए उन्होंने क्रमवार तरीके से इस लक्ष्य तक पहुंचने की योजना बनायी. पहले कठिन मेहनत करते हुए रेलवे में नौकरी की फिर राज्य लोक सेवा आयोग के परीक्षा की तैयारी में लगे. नौकरी के साथ समय प्रबंधन करते हुए आठ से दस घंटे प्रतिदिन मेहनत की और अंततः परीक्षा में सफल हुए.
आयोग की परीक्षा पास किये हर उम्मीदवार साथ ही तैयारी कर रहे हर प्रतिभागी के लिए सुभिनव के काफी बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को इसलिए न चुने क्योंकि इसे पास करने के बाद शानदार जिंदगी मिलेगी. इसे इसलिए चुने क्योंकि हमारे बिहार को मेहनतकश और ईमानदार अधिकारियों की जरूरत है. राज्य के सूरत ए हाल को बदलना है तो भ्रस्टाचार का खत्म होना जरूरी है. राज्य को और आगे ले जाने की जिम्मेदारी प्रतिभावान और मेहनती युवा पीढ़ी पर है. आयोग की परीक्षा इस जिम्मेदारी को निभाने का सुनहरा मौका है. स्वाध्याय,मेहनत और ईमानदारी से सही दिशा में तैयारी कर के इस परीक्षा को आसानी से पास किया जा सकता है.

विनीत कुमार सिन्हा

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