Monday, November 29, 2021
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बांगलादेश हिंसाःदुर्गापूजा के मौके पर भड़की हिंसा साजिश का हिस्सा !शेख हसीना बोलीं अपने देश में भी झांके भारत.

विमर्श( ढाका) बांगलादेश में कई दिनों से पिछले कई दिनों से सांप्रदायिक हो रही है । हिंसा की हालिया घटना में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई है. इससे पहले कथित ईशनिंदा को लेकर अज्ञात मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मंदिरों में तोड़फोड़ की थी और हिंसा फैलाई थी. इन घटनाओं के बाद अल्पसंख्यक समूह ने देशभर में भूख हड़ताल करने की घोषणा की है.

‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार की खबर के मुताबिक, बांग्लादेश में विभिन्न जगह दुर्गा पूजा स्थलों पर हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमले के बाद ताजा झड़प हुई. फिर देश की राजधानी से करीब 157 किलोमीटर दूर फेनी में हिंदुओं के मंदिर और दुकानों में शनिवार को तोड़फोड़ और लूटपाट की गई.इसमें बताया गया कि झड़पों में फेनी मॉडल पुलिस थाने के प्रभारी निजामुद्दीन समेत कम से कम 40 लोग घायल हो गए.

इसी तरह शुक्रवार को जब दुर्गा पूजा की समाप्ति हो रही थी तब ढाका से 100 किलोमीटर की दूरी पर चांदपुर के कुमिला नामक स्थान के पूजा पंडाल पर 100 लोगों ने हमला कर दिया। आक्रमणकर्ताओं ने पूजा पंडाल के मुख्य प्रबंधक की पिटाई करने के बाद चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना के दूसरे दिन एक और व्यक्ति का शव मंदिर के पास के तालाब के बगल में मिला ।

कुमिला की हिंसा के साथ-साथ पूरे देश में 80 अस्थायी पूजा पंडालों पर हमले किए गए। डेढ़ सौ लोगों को घायल कर दिया गया। यह खबर न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी और पीटीआई ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के प्रवक्ता गोविंद चंद्र प्रामाणिक के हवाले से दी है।

यहां यह ध्यान देने की बात है कि बांग्लादेश में दुर्गापूजा हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व है और इस पर्व के मौके पर हिंदू पूजा स्थलों पर हमले जारी हैं । बांग्लादेश पुलिस और इंटेलिजेंस के अनुसार यह देश को अस्थिर करने के लिए प्लान किए हुए तरीके से हिंसा जारी है। शनिवार को ही आत्मघाती हमलावरों ने दानी पारा महा शोषण काली मंदिर पर हमला करके मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया यह स्थान उप जिला मुंशीगंज में है।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह माना जा रहा है कि कुमिला हिंसा सुनियोजित तरीके से रचाई गई थी और इसी का विस्तार देशभर में हुआ। जानते चलें कि हिंसा करने आ रहे सैकड़ों लोगों के साथ पुलिस की भिड़ंत हुई थी और उस दौरान गोलियों से चार लोग मारे गए थे । सूत्र बताते हैं कि इस हिंसा में बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी नेशनलिस्ट पार्टी बीएनपी का साथ बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी दे रही है।

अब हम बात करेंगे बांगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदूओं पर लगातार हो रही हिंसा पर सरकार और समाज की भूमिका पर । यह सोचने की बात है कि बांग्लादेश में इन संप्रदायिक घटनाओं का प्रसार क्या खुद ब खुद हुआ है। दूसरी तरफ बांग्लादेश के गृह मंत्री ए के कमाल ने आगे बढ़कर के जांच के आदेश दिए हैं रैपिड एक्शन बटालियन को लगाया गया है और सावधानी के लिए 90 लोगों को गिरफ्तार किया गया है ।

यह गौर करने की बात है कि इन सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए बांग्लादेश कि हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने 23 अक्टूबर को शुरू करके भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा की। विश्वविद्यालयों के शिक्षकों ने हिंसा की निंदा की है और ढाका विश्वविद्यालय के ब्लू पैनल शिक्षक जो कि बांग्लादेश के शासक दल आवामी लीग समर्थित हैं ।

बताया जा रहा है कि बांगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना सांप्रदायिकता के खिलाफ सख्त हैं। ज्ञातव्य है कि डेढ़ वर्ष पहले शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग व्यापक मतदाताओं के समर्थन से फिर से सत्ता में आई है। शेख हसीना ने सांप्रदायिक शक्तियों से मुकाबला कर के शासन हासिल किया है। लेकिन इस बार हुई हिंसा के बाद प्रधानमंत्री का बयान कि भारत को बी अपने देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर ध्यान देना चाहिए। सेख हसीना का मानना है कि भारत में जो कुछ हो रहा है उसी का असर बांगलादेश में दिखता है।

शेख हसीना का यह बयान गौरकरने लायक है। इसके पहले उन्होंने ऐसा कबी नहीं कहा। अपने शासन के शुरूआती दौर में उन्हें बांग्लादेश के अलग होने के समय पाकिस्तान की तरफ से लड़ने वाले युद्ध बंदियों के कैंप से चुनौती मिली थी। लेकिन शेख हसीना इनके खिलाफ सख्त रही थी और युद्ध के दोषियों को बरी करने की मांग को ठुकरा दिया था।

बांग्लादेश के आवाम ने शेख हसीना के सेकुलर दृढ़ता को अपना समर्थन बनाए रखा है। इस तरह बांग्लादेश में बहुसंख्यक सांप्रदायिकता लगातार शेख हसीना के खिलाफ जोर आजमाइश करती रहती है।
बांग्लादेश में कई प्रबुद्ध नागरिक, जो दोनों ही समुदायों के हैं, सांप्रदायिक हिंसा की बलिवेदी पर चढ़ गए हैं। बल्कि इनमें हिंदू और मुसलमान ही नहीं बांग्लादेश के अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के नामचीन लोग भी हैं।
इस तरह बांग्लादेश में शासन को मुस्लिम सांप्रदायिक शक्तियों से चुनौती मिलती रहती है। ऐसे समय में बांग्लादेश के 10% हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को भी धैर्य पूर्वक काम करना होगा।

बहरहाल इस सारे घटनाक्रम में संतोष की बात यह है कि शेख हसीना ने खुद अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रका जाएगा।

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