Sunday, November 28, 2021
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कश्मीर में UP बिहार के मजदूरों की हो रही है हत्या। पिछले 24 घंटों में 3 मजदूरों की हत्या से सहमे प्रवासी मजदूर

विमर्श( न्यूज डेस्क) रविवार और सोमवार के बीच 24 घंटे के दरमियान कश्मीर घाटी में प्रवासी मजदूरों की चुनकर-चुनकर हत्या कर दी गई। इसमें उत्तर प्रदेश के एक बढ़ई और बिहार के स्ट्रीट वेंडर की हत्या कर दी गई। टारगेट करके की गई हत्याओं का मकसद दहशतगर्दी फैलाना है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में तीन बिहारी मजदूरों पर आतंकी हमले खबर सुनकर घाटी में काम कर रहे बाहर के मजदूर प्रदेश छोड़ने के लिए बेचैन हैं । उन्हें स्थानीय थानों या सैनिक केंद्रों में आश्रय भी दिया जा रहा है।यूपी और बिहार के बहुत सारे मजदूर बस ठीक कर जम्मू कश्मीर के बाहर के कुछ स्थानों पर जा रहे हैं, ताकि अपने प्रदेश लौटने का इंतजाम कर सकें।

दहशतगर्दी का यह खास तरीका होता है, जिसमें टारगेट से ज्यादा व्यापक दायरे में आतंक फैलाया जाता है। इस स्ट्रेटजी से अभी के आतंकी हमले आतंकियों के मंसूबे से ज्यादा व्यापक परिणाम दे रहे हैं।

गौरतलब है कि सन 1991 में जब वीपी सिंह सरकार द्वारा राज्यपाल बनाकर भेजे गए जगमोहन ने घाटी में पंडितों के साथ अंतर्विरोध को तूल दिया था , तब भी आमतौर पर कश्मीर सांप्रदायिक होने से बचा रहा था। यह वह समय था जब एक तरफ सरकार और दूसरी तरफ से आतंकवादी अपना का प्रभुत्व जमाने के लिए काम कर रहे थे। हालांकि उस दौर में भी आतंकी हमले में कई बिहारी मजदूरों की मौत हुई थी।

सोमवार को दिल्ली में हुई एक बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस कप्तान और केंद्रीय आर्म्ड पुलिस के प्रमुख मौजूद हुए। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुी इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी शामिल हुए थे। बैठक का आयोजन इंटेलिजेंस ब्यूरो ने किया था। सोमवार को हुई इस हाई लेवल मीटिंग में घाटी में जगह जगह पर ड्रोन की सहायता से हथियार पहुंचाने का मसला छाया रहा। इस पर गहरी चिंता जाहिर की गई।

इन सबके बीच इस समय भारतीय सेना के प्रमुख जनरल एम नरवणे दो दिनों के दौरे पर जम्मू कश्मीर में हैं। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद और पाकिस्तान में आईएसआई के द्वारा भारतीय नौजवानों को बहाल कर प्रशिक्षित किए जाने से , घाटी में युवकों के रेडिकलाइजेशन का खतरा गंभीर हुआ है।

उधर बिहार सरकार ने घाटी में मारे गए बिहारी मजदूरों के आश्रितों के लिए ₹ 2 लाख देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुराने अंदाज में अपना पुराना बयान इसी मौके पर दोहराया है कि मजबूरी में किसी बिहारी को बाहर काम करने जाना नहीं होगा। नीतीश ने वास्तविकताओं की अनदेखी करते हुए कहा कि लाखों बिहारी रोजगार के लिए मौसमी पलायन कर जाते हैं ।

बहरहाल जम्मू कश्मीर में बढ़ती आतंकी घटनाओं के बीच सरकार ने दुबई की सरकार के साथ सहमति के दस्तावेज (एमओयू) पर दस्तखत किया है। देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जम्मू कश्मीर का दौरा करने के बाद बताया है कि जम्मू और कश्मीर घाटी में रोजगार बढ़ाने के लिए 28 हजार करोड़ रुपयों का पैकेज दिया गया है। दुबई के साथ हुए समझौते के बाद अनेक निवेशक घाटी में रियल ईस्टेट में दिलचस्पी ले रहे हैं।

बहरहाल जम्मू कश्मीर में ऊपर से पल रही शांति के नीचे की अशांति इस समय तीखे रूप से जाहिर होने लगी है। इस समय ही याद करना चाहिए कि घाटी के नेताओं ने, गुपकर घोषणापत्र तैयार करके,उसके आधार पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातें की थी और घाटी में आम चुनाव कराने की अपेक्षा की थी।

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