Tuesday, January 25, 2022
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POVERTY OF BIHAR बिहार की गरीबीःथूकम फजीहत का नहीं यह गंभीर सदमे का मसला —-च0अ0प्रियदर्शी

विमर्श(पटना)-लूट,हत्या,अंधेरगर्दी और जाति पाति -क्या यही है BIHAR प्रदेश की नियति। भारत का सबसे गरीब राज्य BIHAR . यहां आधे से ज्यादा (52%) लोग गरीब हैं । BIHAR में भीषण बेरोजगारी हैं,यहां असंगठित क्षेत्र में 3.49 करोड़ मजदूर हैं।यही कह रही है नीति आयोग की रिपोर्ट।

नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार सबसे फिसड्डी राज्य घोषित हुआ तो बिहार में विपक्षी दलों की बांछे खिल गई। सबी नेता नीतीश कुमार पर बरसने लगे। नीतीश कुमार भी नीति आयोग की रिपोर्ट पर तो भड़के हीं , अपने विरोधियों के खिलाफ भी ताल ठोक रहे हैं। नीतीश कुमार कह रहे हैं कि नीति आयोग जो सभी राज्यों को एक बराबर मानकर रैंकिंग करती है यह तरीका सरासर गलत है।

16 साल पहले नीतीश कुमार जब सत्ता में आए थे, उसके बाद ही शुरू हुआ बजट के पहले आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने का चलन । केंद्र सरकार के चलन में तो यह पहले से ही था। बजट के पहले पिछले वित्तीय वर्ष के आर्थिक सर्वे को संसद में रखने का चलन ज्यादातर राज्यों में नहीं है।

केरल में गरीबी 0.71% से भी कम है इसके बाद नंबर आता है 4 राज्यों का जहां गरीबी छः प्रतिशत से भी कम है। ये राज्य है क्रमशः गोवा 3.76%, सिक्किम 3.82%, तमिलनाडु 4.89% और पंजाब 5.59% ये आंकड़े भारत के नीति आयोग द्वारा तैयार विविध रूपों से गरीबी सूचकांक (MPL – multimentional Poverty Index) के हैं। इसे बहु आयामी गरीबी का सर्वे कह सकते हैं।

गरीब राज्यों की सूची में BIHAR (51.91%) प्रतिशत गरीबी)के बाद उत्तर प्रदेश 42.16% झारखंड 37.89% मध्य प्रदेश 36.65% और मेघालय 32.67% है। यह अजीब बात है कि एक तरफ जहां भारत आजादी के बाद तीन दशकों तक खाद्यान्न के अभाव वाला देश था- अब खाद्य प्रचुरता की स्थिति में आकर निर्यातक देश बन गया है। वहीं दूसरी तरफ BIHAR अभाव और कुपोषण के शिकार लोगों का राज्य बनता जा रहा है।

नीतीश कुमार की सरकार के बड़बोलेपन के मुकाबले वस्तु स्थिति उल्टी है । सूबे में न्याय के साथ विकास का नारा निरर्थक हो गया है। अब इस नारे को दोहराया भी नहीं जाता है। माता शिशु -स्वास्थ्य के मामले में BIHAR अन्य राज्यों से बहुत पीछे है। BIHAR में स्कूल जाने वाले या स्कूल में हाजिर रहने वाले छात्र सबसे कम अनुपात में हैं। जानते चले कि भारत की आंकड़ा जुटाने की MPL पद्धति संयुक्त राष्ट्र संघ डेवलपमेंट कार्यक्रम UNDP या ऑक्सफोर्ड के गरीबी और मानव विकास पहल (OPIHI) की मानकों पर आधारित है।

BIHAR की यह फिसड्डी हैसियत मगरूर शासन पक्ष और आत्महीन विपक्ष के तू-तू मैं-मैं में चला गया है। परंतु गरीबी- अशिक्षा- बीमारी – अंधेरगर्दी के दलदल में रहने की जगह इससे बाहर निकलने की पहल पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी है।

नीतीश सरकार के लिए
BIHAR के आर्थिक सर्वेक्षण ने जब यह दावा किया है कि 2405 के मुकाबले 2011 से 12 के बीच गरीबी के अनुपात में 21% तक कमी आई है तो उधर नीति आयोग ने 2 आंकड़े जुटाने की अलग पद्धति अपना ली है । नीति आयोग के अनुसार पूरे देश में गरीबी का अनुपात 15% घटा है। यह भी दावा किया जा रहा है कि 1993 से 1994 में जहां बिहार में 55% गरीबी थी- 2011 – 12 में घटकर 33.7% रह गई है.इस बीच देश की गरीबी 36% से घटकर 22% रह गई है।

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